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भीतर की खोज

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भीतर की खोज

परमात्मा का हर सर्जन परमात्मा की उर्जा का ही व्यक्त स्वरुप है. हम भी परमात्मा का ही उत्कृष्ट सर्जन है, परमात्मा का ही व्यक्त स्वरुप है हम.

अपने अहेंकार और संसार की माया की वजेह से हम अपने आप को परमात्मा से भिन्न समझते है हलाकि ऐसा हे नहीं. हम जो भी सवालों के जवाब खोजते है वह सारे जवाब और परमात्मा हमारे भीतर ही है. परमात्मा को कहीं मंदिर मस्जिद और गिरजाघरो में खोजने की आवश्यकता नहीं है. परमात्मा पुरे अनंत कोटि ब्रह्माण्ड का केंद्र बिंदु है और हम सभी जिव उसी केंद्र बिंदु परमात्मा का व्यक्त स्वरुप है. हम में से हर कोई अपनी अनंत चेतना को जगा सकता है और अपने भीतर रहे परमात्मा का अनुभव कर सकते है.

इस धरती पर हर जीव परमात्मा का ही व्यक्त स्वरुप है लेकिन अनेक जन्मो की यात्रा के बाद जब आत्मा मानव रूप में अवतरित होती है तब हर मानव में यह क्षमता होती है की वह अपने भीतर के असीम चेतन स्वरुप को महसूस करें. किन्तु हम परमात्मा को बाहर खोजना शुरु कर  देते है. अपने अहेंकार और मोह की वजेह से दर असल में हम अपना अध्यात्मिक होश खो  चुके होते है और एक प्रकार से बेहोशी में यंत्रवत जीवन जीना शुरू कर देते है. जरुरत है उस बेहोशी से जागने की.

आज इस धरती पर जोश बढाने वालो की कोई कमी नहीं है. वोट्स एप पे, फेस बुक पे, जहाँ देखो जोश बढाने वाले सन्देश एवं वीडियो की भरमार है. हर कोई कह रहा है ‘कुछ भी असम्भव नहीं’ ,’हाँ तुम ये कर सकते हो’. जोश का होना अच्छी बात है लेकिन साथ होश का होना भी जरुरी है. होश का होना मतलब अपने असीम परमात्मा स्वरुप का अहेसास होना. सिर्फ जोश बढाने वाली बाते आपके अन्दर अहम् और उन्माद पैदा करती है. हो सकता है जोश आपको भौतिक कामयाबी दे भी दें लेकिन याद रहे अंत में कभी न कभी तो परमात्मा आपके अहेंकार को क्षीण करने के लिए उस स्थिति में डालेगा जब आपको परमात्मा के शरण में जाने के अलावा कोई चारा नहीं होता.

जोश बढाकर ये कहेना ‘तुम ये कर सकते हो’ आसान है. लेकिन परमात्मा तुमसे क्या करवाना चाहता है और तुम्हे सही में क्या करना चाहिए यह तो सही गुरु ही बता सक्कता है. बाहर से मिलने वाला जोश क्षणिक होता है, में जोश बढाने के साथ साथ होश में लाने का काम भी करता हूँ .

अहेंकार प्रेरित जोश में जीने की वजेह से और भौतिक कामयाबी को ही लक्ष्य मानकर जीने की वजेह से हर कोई कुछ न कुछ समस्या से जुज रहा है और उस समस्या के समाधान के लिए तरह तरह के लोगो के पीछे भागता है.

सद्गुरु कृपा से मुझे मिली हुई क्षमता से मैं आपको अपने भीतर के असीम परमत्मा स्वरुप का परिचय करवा सकता हूँ. एक बार यह परिचय आपको हो जाय बाद में आपको किसी और के पास जाने की जरुरत नहीं रहेती. सारे सवालों के जवाब और सारी समस्याओं के समाधान भी आपको अपने भीतर ही मिलने लगता है. जब आपको अपने भीतरी परमात्मा स्वरुप का परिचय आ जाता है तो आपको समझ आ जाता है की हर इंसान दर असल में परमात्मा का ही प्रतिबिम्ब है , सारी भावनाओ से परे उठकर साक्षीभाव उत्पन्न हो जाता है जीवन मैं . जीवन का सही अर्थ समझ आ जाता है. मोक्ष, मुक्ति आत्म साक्षात्कार इत्यादि सब बातों का सही अर्थ समझ आ जाता है. सारी समस्याओं का आध्यात्मिक पहलु समझ में आने के साथ साथ परमात्मा का सानिध्य और मार्गदर्शन मिलने लगता है.

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